Meaning of

शराप

sharaap • شراب

मदिरा; शराब; नशा

wine; liquor; intoxication

شراب; مے; نشہ

Arabic

वो गुल-फ़रोश कहाँ अब गुलाब किस से लूँ
नहीं रहा मिरा साक़ी शराब किस से लूँ

29

Download Image

तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो
तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है

123

Download Image

प्रेम की गली में सब शराब ले कर आए थे
हम बहुत ख़राब थे किताब ले कर आए थे

77

Download Image

हम हैं शौक़ीन पुरानी ही शराबों के दोस्त
हम तो हैं ढलते हुए हुस्न पे मरने वाले

56

Download Image

मुझे शराब पिलाई गई है आँखों से
मेरा नशा तो हज़ारों बरस में उतरेगा

49

Download Image

कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई
आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई

46

Download Image

मेरी जवानी को कमज़ोर क्यूँ समझते हो
तुम्हारे वास्ते अब भी शबाब बाक़ी है

ये और बात है बोतल ये गिर के टूट गई
मगर अभी भी ज़रा सी शराब बाक़ी है

43

Download Image

तुम्हारे बा'द के बोसों में जानाँ
तुम्हारी साँस की ख़ुशबू नहीं थी

39

Download Image

दुनिया को मारा जिगर के शे'रों ने
जिगर को शराब ने मारा

38

Download Image

इसी फ़कीर की गफ़लत से आगही ली है
मेरे चराग़ से सूरज ने रौशनी ली है

गली-गली में भटकता है शोर करता हुआ
हमारे इश्क़ ने सस्ती शराब पी ली है

36

Download Image

वो गुल-फ़रोश कहाँ अब गुलाब किस से लूँ
नहीं रहा मिरा साक़ी शराब किस से लूँ

29

Download Image

तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो
तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है

123

Download Image

अपने मूल अर्थ में, 'शराप' मदिरा या किसी भी नशीले पेय को संदर्भित करता है। कविता में, यह अक्सर प्रेम की मादकता, वास्तविकता से पलायन, या निषिद्ध सुखों की खोज का प्रतीक होता है। यह शब्द आनंद और दुःख, लिप्तता और पछतावे की द्वैतता को धारण करता है।

कवि 'शराप' का उपयोग प्रेम के आनंद और निराशा को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमी की दृष्टि की मिठास या अस्वीकृत प्रेम की कड़वाहट का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द अक्सर संयम के विपरीत होता है, जुनून के समर्पण के आकर्षण को उजागर करता है।

कविता में, 'शराप' मानव भावनाओं की गहराईयों की खोज का माध्यम बन जाता है। यह आनंद और दुःख के बीच की पतली रेखा की याद दिलाता है।