Meaning of

शिक़श्ता

shikashta • شکستہ

टूटा हुआ; बिखरा हुआ; पराजित

broken; shattered; defeated

ٹوٹا ہوا; بکھرا ہوا; شکست خوردہ

Persian

दिल-शिकस्ता हो गया है और फिर भी जल रहा है
एक ग़म है जो कहीं दिल में हमारे पल रहा है

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शिकस्ता दिल शब-ए-ग़म दर्द रुसवाई
अरे इतना तो चलता है मुहब्बत में

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शिकस्ता नाव समझ कर डुबोने वाले लोग
न पा सके मुझे साहिल पे खोने वाले लोग

ज़रा सा वक़्त जो बदला तो हम पे हँसने लगे
हमारे काँधे पे सर रख के रोने वाले लोग

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बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका

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साहिल पे क़ैद लाखों सफ़ीनों के वास्ते
मेरी शिकस्ता नाव है तूफ़ाँ लिए हुए

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कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला
और डूबने वालों का जज़्बा भी नहीं बदला

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ज़िंदगी काटी हिज्र में लेकिन
मौत के दस्तरस नहीं काटी

उस ने डीपी ही बदली जज साहिब
इश्क़ में उस ने नस नहीं काटी

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बस इतनी सी मेरी तक़दीर बदली
कभी ज़िंदाँ कभी ज़ंजीर बदली

न इन आँखों ने अपने ख़्वाब बदले
न ख़्वाबों ने कोई ता'बीर बदली

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दर-ब-दर किसी जानिब रोज़ चल रहा हूँ मैं
इक अज़ीब सूरत में ख़ुद ही ढल रहा हूँ मैं

कौन जल गया अंदर कौन मर गया मुझ
में
किस की मौत पर तन्हा रोज़ जल रहा हूँ मैं

इतना कहने पर भी जब बदली ही नहीं दुनिया
बे-वजह ही ख़ुद को फिर क्यूँ बदल रहा हूँ मैं

ख़ाक हो चुका है दिल चल रही मिरी साँसें
रफ़्ता रफ़्ता ही ख़ुद के दिन निगल रहा हूँ मैं

ज़िंदगी भला अब ये किस तरह बसर होगी
आज कल ग़मों से भी कब बहल रहा हूँ मैं

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मिरी जगह कोई और उस की जगह कोई और
कहानी तो नहीं बदली बदल गए किरदार

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दिल-शिकस्ता हो गया है और फिर भी जल रहा है
एक ग़म है जो कहीं दिल में हमारे पल रहा है

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शिकस्ता दिल शब-ए-ग़म दर्द रुसवाई
अरे इतना तो चलता है मुहब्बत में

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'शिक़श्ता' का मूल अर्थ किसी वस्तु के भौतिक रूप से टूटने या बिखरने का है। कविता में, यह शब्द भावनात्मक और आध्यात्मिक पराजय या विखंडन की स्थिति को व्यक्त करता है, जो अक्सर असुरक्षा और हानि की भावना को उजागर करता है।

'शिक़श्ता' का उपयोग कवि मानव आत्मा की नाजुकता को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अक्सर खोए हुए प्रेम, अधूरे सपनों और समय के अनिवार्य प्रवाह के बारे में छंदों में प्रकट होता है।

काव्य रूप में, 'शिक़श्ता' अस्तित्व की नाजुक दरारों को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है।