Meaning of

शुग़्ल

shughl • شغل

व्यवसाय; शौक; मनोरंजन

occupation; pastime; amusement

پیشہ; شوق; تفریح

Arabic

रात भर चाँद को निहारेंगे
ये शग़ल शा'इरी से अच्छी है

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शग़्ल था दश्त-नवर्दी का कभी ऐ 'ताबाँ'
अब गुलिस्ताँ में भी जाते हुए डर लगता है

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मैं ने पूछा कि है क्या शग़्ल तो हँसकर बोले
आज कल हम तेरे मरने की दुआ करते हैं

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ज़ीस्त है मुझ सेे ख़फ़ा लेकिन गिला कोई नहीं
मसअला ये है कि मेरा मसअला कोई नहीं

कट रही है ज़िंदगी बेकार फ़ुर्सत में यूँँ ही
मश्ग़ला ये है कि मेरा मश्ग़ला कोई नहीं

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एक ही तो मशग़ला है अब मेरा
अब क्या उस सेे दिल लगाना छोड़ दूँ

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दौर था कोई ज़मीर-ओ-वर्द का इंसानियत का
वर्द अब सब लोभ के हैं मश्ग़ला क्या झूठ क्या सच

मसअला क़ैद-ए-हवस का और मसाइल जिस्म के हों
फिर भला क्या हासिल-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा क्या झूठ क्या सच

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चढ़ान भी है ढलान भी है
बताओ है ये मुआमला क्या

चराग़ याँ जल के बुझ रहे हैं
के ज़िंदगी का है मशग़ला क्या

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ख़ुद ही सवाल करना ख़ुद ही जवाब देना
तन्हाइयों में अक्सर ये शग़्ल है हमारा

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रोज़-ओ-शब के हैं मशग़ले 'हैदर'
सुब्ह था
में कि शाम अपने को

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रात भर चाँद को निहारेंगे
ये शग़ल शा'इरी से अच्छी है

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शग़्ल था दश्त-नवर्दी का कभी ऐ 'ताबाँ'
अब गुलिस्ताँ में भी जाते हुए डर लगता है

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मूल रूप से, 'शुग़्ल' किसी भी प्रकार के व्यवसाय या संलग्नता को संदर्भित करता है, चाहे वह काम हो या अवकाश। कविता में, यह अक्सर उस चीज़ का सार पकड़ता है जो दिल और दिमाग को व्यस्त रखती है, चाहे वह प्रेम हो, कला हो, या चिंतन।

'शुग़्ल' का उपयोग कवि प्रेम और आकांक्षा के विषयों की खोज के लिए करते हैं, अक्सर इसे साधारण जीवन से विपरीत रखते हैं। यह प्रिय की मोहक उपस्थिति या कवि की अपनी कलात्मक खोजों का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'शुग़्ल' आत्मा की सच्ची संलग्नताओं का प्रतिबिंब बन जाता है। यह पाठक को आमंत्रित करता है कि वे विचार करें कि वास्तव में उनके दिल को क्या व्यस्त रखता है।