Meaning of

सिद्ध

siddh • سدھ

संपन्न; सिद्ध; प्रबुद्ध

accomplished; perfected; enlightened

کامل; مکمل; روشن ضمیر

Sanskrit

शा'इरी तो सुधार दूँ मैं मगर
उस सेे रिश्ते बिगड़ गए तो फिर

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किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया
तुम्हारी उर्मियों का मैं, उर-अंतर हो नहीं पाया

सरल थीं मन की प्रतिमाएं, मगर अफ़सोस है इतना
मैं सब कुछ था तेरा, मेहंदी महावर हो नहीं पाया

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मुहब्बत से सभी हैं दूर, या'नी
नए लड़के सुधारे जा रहे हैं

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जीवन में इक सरल सा ही सिद्धांत है मेरा
जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं

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मिले है यार हाँ मौक़े' सुधरने के यहाँ दिल को
समझ में बात आ जाए, सभी हाँ फिर सुधर जाए

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मुझ को अब तुझ सेे दिल की उम्मीद नहीं है
तुझ को मैं सुध आ जाऊँँ इतना काफ़ी है

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बात सुन लो मेरी सुधर जाओ
इश्क़ अच्छा नहीं है घर जाओ

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चल दिया पलट के मैं घर ख़ुमार बाक़ी है
कुछ सुधार है मुझ
में कुछ सुधार बाक़ी है

साथ जो मेरे था, मैं क़र्ज़-दार सबका हूँ
शुक्र है ख़ुदा मुझ पे इक उधार बाक़ी है

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सुधारस आप के अधरों से थोड़ा सा पिला दो तो
मेरे दिल का ये रेगिस्तान भी गुलज़ार हो जाए

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आदतें सारी छोड़ दी मैं ने
तुम तो मुझ को सुधार कर गई हो

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शा'इरी तो सुधार दूँ मैं मगर
उस सेे रिश्ते बिगड़ गए तो फिर

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किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया
तुम्हारी उर्मियों का मैं, उर-अंतर हो नहीं पाया

सरल थीं मन की प्रतिमाएं, मगर अफ़सोस है इतना
मैं सब कुछ था तेरा, मेहंदी महावर हो नहीं पाया

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'सिद्ध' शब्द पूर्णता और निपुणता का आभास कराता है। अपने मूल संदर्भ में, यह किसी ऐसे व्यक्ति को दर्शाता है जिसने आध्यात्मिक या बौद्धिक उपलब्धि के उच्च स्तर को प्राप्त किया हो। कविता ने इस शब्द को आत्म-खोज की यात्रा और आंतरिक शांति की प्राप्ति को व्यक्त करने के लिए अपनाया है।

कवि अक्सर 'सिद्ध' का उपयोग प्रबोधन और आत्म-साक्षात्कार के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह एक लंबी यात्रा के समापन या एक प्रबुद्ध आत्मा की शांतिपूर्ण बुद्धिमत्ता का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द अज्ञानता के उथल-पुथल और अपूर्ण इच्छाओं के अराजकता के विपरीत है।

कविता के क्षेत्र में, 'सिद्ध' उस आत्मा की शांति को समेटे हुए है जिसने अपना सच्चा मार्ग पा लिया है। यह एक ऐसा शब्द है जो पूर्णता की मौन प्रतिध्वनि के साथ गूंजता है।