Meaning of

तअ'ल्लुक़

ta'alluq • تعلق

संबंध; जुड़ाव; रिश्ता

relationship; connection; link

رشتہ; تعلق; رابطہ

Arabic

तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है

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भरे हुए जाम पर सुराही का सर झुका तो बुरा लगेगा
जिसे तेरी आरज़ू नहीं तू उसे मिला तो बुरा लगेगा

ये आख़िरी कंपकंपाता जुमला कि इस तअ'ल्लुक़ को ख़त्म कर दो
बड़े जतन से कहा है उस ने नहीं किया तो बुरा लगेगा

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हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हंस
जो तअ'ल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं

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इसीलिए तो किसी को बताने वाला नहीं
कि तेरा मेरा तअल्लुक़ ज़माने वाला नहीं

पलट के आ ही गए हो तो इतना ध्यान रहे
तुम्हारा दोस्त हूँ लेकिन पुराने वाला नहीं

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बस एक रस्म-ए-तअल्लुक़ निभाने बैठे हैं
वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं

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न जाने ख़त्म हुई कब हमारी आज़ादी
तअल्लुक़ात की पाबंदियाँ निभाते हुए

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हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे
वो यार बा-वफ़ा न सही बे-वफ़ा तो है

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'फ़राज़' तर्क-ए-त'अल्लुक़ तो ख़ैर क्या होगा
यही बहुत है कि कम कम मिला करो उस से

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'मीर' से बैअत की है तो 'इंशा' मीर की बैअत भी है ज़रूर
शाम को रो रो सुब्ह करो अब सुब्ह को रो रो शाम करो

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जुर्म की तरह मोहब्बत को छुपा रक्खा है
हम गुनहगार नहीं हैं ये बताएँ किस को

रूठ जाते तो मनाना कोई दुश्वार न था
वो तअ'ल्लुक़ ही न रक्खें तो मनाएँ किस को

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तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है

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भरे हुए जाम पर सुराही का सर झुका तो बुरा लगेगा
जिसे तेरी आरज़ू नहीं तू उसे मिला तो बुरा लगेगा

ये आख़िरी कंपकंपाता जुमला कि इस तअ'ल्लुक़ को ख़त्म कर दो
बड़े जतन से कहा है उस ने नहीं किया तो बुरा लगेगा

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तअ'ल्लुक़ का मूल अर्थ है दो या अधिक तत्वों के बीच का संबंध या जुड़ाव। कविता में, यह शब्द अक्सर मानवीय संबंधों की गहराई और जटिलता को दर्शाता है, उन अदृश्य धागों को जो आत्माओं को जोड़ते हैं, और उन भावनाओं के जटिल नृत्य को जो ऐसे संबंधों में शामिल होते हैं।

कवि अक्सर तअ'ल्लुक़ का उपयोग प्रेम और वियोग के विषयों को खोजने के लिए करते हैं, जुड़ाव की लालसा और टूटे संबंधों के दर्द को व्यक्त करने के लिए। यह संगति की गर्माहट या अलगाव की ठंडक को उजागर कर सकता है।

तअ'ल्लुक़ मानवीय बंधनों का सार पकड़ता है, भावनाओं की एक ऐसी बुनाई करता है जिसे कवियों ने लंबे समय से संजोया है।