Meaning of

तारीकी

taarikee • تاریکی

अंधकार; अस्पष्टता

darkness; obscurity

تاریکی; ابہام

Arabic

किस को पता था मैं हूँ तारीकी-ए-मिज़ाज
किस ने दिए को ला के चौखट पे रख दिए

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चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ

चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी
हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ

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ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि 'फ़राज़'
रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़

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तारीकियाँ हैं साथ मिरे और सफ़र मुदाम
कल तक था हम-क़दम जो फ़रिश्ता किधर गया

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तारीकी से जलता है दीवारें इस की हैं मुख़बिर
रात में साया एक दिए को तेल लगाके आया है

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घोर उदासी देखी है उन चेहरों ने
जिन चेहरों को सदियों तक मुस्काना था

दौड़ रहे थे आगे-पीछे जो साए
तारीकी में उन्हें तो मुर्शिद जाना था

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रफ़तार इतनी तेज़ थी सैलाब-ए-दर्द की
आँखों के बाँध तोड़ के आँसू निकल पड़े

फिर भी न आफ़ताब की गैरत को आया होश
तारीकियाँ मिटाने को जुगनू निकल पड़े

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तेरी यादों की तारीकी में जाँ
हम अपना दिल जलाया करते हैं

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किस को पता था मैं हूँ तारीकी-ए-मिज़ाज
किस ने दिए को ला के चौखट पे रख दिए

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चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ

चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी
हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ

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'तारीकी' शब्द मन को अंधकार के आवरण में लपेट देता है, एक ऐसी जगह जहाँ प्रकाश को प्रवेश करने में संघर्ष करना पड़ता है। कविता में, यह अज्ञात, भय और रहस्यों की खोज के लिए एक कैनवास बन जाता है जो छायाओं में निवास करते हैं।

कवि अक्सर 'तारीकी' का उपयोग निराशा, आत्मनिरीक्षण और अज्ञात के विषयों में गहराई से उतरने के लिए करते हैं। यह मानव भावनाओं की गहराई और प्रकाश और अंधकार के बीच के विपरीत की खोज के लिए एक पृष्ठभूमि के रूप में कार्य करता है।

कविता में, 'तारीकी' केवल प्रकाश की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि चिंतन और खोज के लिए एक गहन स्थान है।