Meaning of

तख़्य्युल

takhyyul • اڑو

कल्पना; विचार

imagination; fancy

تخیل; تصور

Arabic

बिगाड़ो मुझे अब सही से बचा भी नहीं हूँ
यूँँ तो फिर कभी मैं किसी पर जचा भी नहीं हूँ

भरी दुनिया में हैं कलाकार ढेरों मगर फिर
कभी बनके मेंहदी किसी पर रचा भी नहीं हूँ

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वो गले से लिपट के सोते हैं
आज-कल गर्मियाँ हैं जाड़ों में

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मैं पहले हारी थी इस बार हारने की नहीं
तू जा रहा है तो जा मैं पुकारने की नहीं

मुझे पहाड़ों पे मौसम का लुत्फ़ लेना है
मैं तेरे कमरे में सर्दी गुज़ारने की नहीं

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धूल मिट्टी हो ज़मीं और काम कितना हो कहीं भी
साथ मिल कर के सनम हम साफ़ पूरा घर करेंगे

साथ झाड़ू साथ पोछा साथ मिल कर के धुलाई
हर दीवाली में सफ़ाई साथ हम मिल कर करेंगे

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ज़रा रूठ जाने पे इतनी ख़ुशामद
'क़मर' तुम बिगाड़ोगे आदत किसी की

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ज़रा सी देर आँखों में चली जाए तुम्हारी याद
बहुत दिन हो गए दिल का मुझे झाड़ू लगाना है

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पुरानी बात पर कब तक नए क़िस्से बिगाड़ोगे
समर न दे सका तो क्या दरख़्तों को जला दोगे

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ज़मींनें काँप उठती हैं दहाड़ों से नगाड़ों की
कहीं इक मुल्क जब इक मुल्क पर परचम लगाता है

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जाड़ों की रातें उस पर भी तुम सेे ये जुदाई
बाहों की छोड़ो हम को हासिल नहीं रज़ाई

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पहाड़ों सी फ़ितरत का इंसान हूँ मैं
कहाँ तक रखोगे झुकाने की ख़्वाहिश

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बिगाड़ो मुझे अब सही से बचा भी नहीं हूँ
यूँँ तो फिर कभी मैं किसी पर जचा भी नहीं हूँ

भरी दुनिया में हैं कलाकार ढेरों मगर फिर
कभी बनके मेंहदी किसी पर रचा भी नहीं हूँ

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वो गले से लिपट के सोते हैं
आज-कल गर्मियाँ हैं जाड़ों में

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तख़्य्युल कल्पना की वह असीमित दुनिया है जहाँ विचार वास्तविकता की सीमाओं से परे उड़ान भरते हैं। कविता में, यह वह कैनवास है जहाँ सपने और विचार जीवंत चित्र बनाते हैं, साधारण से परे जाते हुए।

कवि अक्सर तख़्य्युल का उपयोग कल्पना और अतिक्रमण के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह उन्हें अमूर्त अवधारणाओं में गहराई से जाने और ऐसी दुनिया बनाने की अनुमति देता है जो पाठक की धारणा को चुनौती देती है। यह कठोर यथार्थवाद के विपरीत, एक नरम और अधिक तरल कथा प्रस्तुत करता है।

तख़्य्युल कवि की अज्ञात की ओर उड़ान है, एक यात्रा जहाँ वास्तविकता मन की इच्छा के अनुसार झुकती है।