Meaning of

तक़्सीम

taqseem • تقسیم

विभाजन; वितरण; बँटवारा

division; distribution; partition

تقسیم; بٹوارہ; تقسیم کاری

Arabic

रोटियाँ तक़्सीम करने की क़सम खाते हैं जो
ज़हर वो ही घोलते हैं मुल्क के आहार में

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घर की तक़्सीम में अँगनाई गँवा बैठे हैं
फूल गुलशन से शनासाई गँवा बैठे हैं

बात आँखों से समझ लेने का दावा मत कर
हम इसी शौक़ में बीनाई गँवा बैठे हैं

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बड़ा होकर जो छोटे लोगों की ताज़ीम करता है
ज़माना ऐसे ही इंसान को तसलीम करता है

चलो छोड़ो सियासत के पुराने ता'ने बाने को
यही वो फ़लसफ़ा है जो हमें तक़्सीम करता है

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कह दो अगर तक्सीम सरमाया हो मेरे इश्क़ का
सब छोड़ो बस स्पर्श हाथों का अदा कर दोगी ना

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शहर और बस्ती जलाती है सियासत आज भी
रहनुमा तक़सीम करते हैं अदावत आज भी

हम शिकायत ज़ुल्म की कैसे करें किस से करें
खा रही है हक़ ग़रीबों का हुकूमत आज भी

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रोटियाँ तक़्सीम करने की क़सम खाते हैं जो
ज़हर वो ही घोलते हैं मुल्क के आहार में

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घर की तक़्सीम में अँगनाई गँवा बैठे हैं
फूल गुलशन से शनासाई गँवा बैठे हैं

बात आँखों से समझ लेने का दावा मत कर
हम इसी शौक़ में बीनाई गँवा बैठे हैं

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'तक़्सीम' का मूल अर्थ किसी चीज़ को भागों में बाँटना है, चाहे वह भौतिक हो या अमूर्त। कविता में, यह विभाजन अक्सर दिल, भावनाओं या भाग्य तक फैलता है, जो एक दर्दनाक और अपरिहार्य विखंडन का संकेत देता है।

'तक़्सीम' का उपयोग कवि अलगाव और तड़प के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेम से विभाजित दिल या सीमाओं से विभाजित भूमि की छवि को उभार सकता है। यह शब्द उदासी और चिंतन की भावना को वहन करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'तक़्सीम' हमारे जीवन को आकार देने वाले विभाजनों की एक मार्मिक याद दिलाता है। यह अलगाव की प्रकृति पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है।