Meaning of

तवज्जोह

tavajjoh • برق

ध्यान; एकाग्रता; विचार

attention; focus; consideration

توجہ; ارتکاز; غور

Arabic

वालिद तिरा है ज़ुल्म हम पर कर रहा
यूँँ भेजकर बाज़ार बुर्के में तुझे

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हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं

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तोड़ कर तुझ को भला मेरा भी क्या बन जाता
उल्टा मैं ख़ुद की मुहब्बत प सज़ा बन जाता

जितनी कोशिश है तिरी एक तवज्जोह के लिए
उस सेे कम में तो मैं दुनिया का ख़ुदा बन जाता

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चारा-गर ऐ चारा-गर चिल्लाती थी
ज़ख़्मों को भी हाथ नहीं लगवाती थी

पता नहीं कैसा माहौल था उस के घर
बुर्का पहन के शर्टें लेने आती थी

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मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया

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कभी यक-ब-यक तवज्जोह कभी दफ़अ'तन तग़ाफ़ुल
मुझे आज़मा रहा है कोई रुख़ बदल बदल कर

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अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है
चराग़ों के तले भी रौशनी जाने लगी है

नया पहलू सलीक़े से बयाँ करना पड़ेगा
कहानी अब तवज्जोह से सुनी जाने लगी है

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बस एक वही थी जो भरोसे वाली थी
वरना तो ये दुनिया धोखे वाली थी

मेरी गीता में शामिल थी आयत भी
इस कृष्णा की राधा बुरखे वाली थी

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किसी की बर्क़-ए-नज़र से न बिजलियों से जले
कुछ इस तरह की हो ता'मीर आशियाने की

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सोचो कितना अच्छा हो सकता है
ये सब पहले जैसा हो सकता है

बुरखे वाली वो चंदन वाला मैं
साहब क्या ये रिश्ता हो सकता है

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वालिद तिरा है ज़ुल्म हम पर कर रहा
यूँँ भेजकर बाज़ार बुर्के में तुझे

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हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं

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'तवज्जोह' शब्द एकाग्रता और ध्यान की भावना को जागृत करता है। कविता में, यह अक्सर किसी विषय या प्रिय के प्रति भावनात्मक और बौद्धिक जुड़ाव को गहरा करता है। यह किसी महत्वपूर्ण चीज़ की ओर मन और हृदय को जानबूझकर मोड़ने का सुझाव देता है।

कवि 'तवज्जोह' का उपयोग प्रिय या विचार पर ध्यान की तीव्रता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह ध्यान देने की लालसा या विचार की गहराई को व्यक्त कर सकता है। अक्सर उदासीनता के विपरीत, यह जुड़ाव की लालसा को उजागर करता है।

कविता में, 'तवज्जोह' हृदय और संसार के बीच एक पुल बन जाता है, मान्यता और समझ के लिए एक मौन याचना।