Meaning of

तिज़ारत

tijaarat • تجارت

व्यापार; वाणिज्य; कारोबार

trade; commerce; business

تجارت; کاروبار

Arabic

हज़रत ए नासेह कहते हैं मुहब्बत मार देगी
इश्क़ कहता है मुहब्बत को तिज़ारत मार देगी

और गुलचीं तो करेगा बारहा यूँँ ग़ारत ए गुल
इन गुलों को यार गुलचीं की रफ़ाक़त मार देगी

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कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना
एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना

जिस को तुम चाहो कोई और न चाहे उस को
इस को कहते हैं मोहब्बत में सियासत करना

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दीवार उठाने की तिजारत नहीं आई
दिल्ली में रहे और सियासत नहीं आई

बिकने को तो दिल बिक गया बाज़ार में लेकिन
जो आप बताते थे वो क़ीमत नहीं आई

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दोस्ती और किसी ग़रज़ के लिए
वो तिजारत है दोस्ती ही नहीं

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इस मुहब्बत में तिजारत नहीं होती मुझ सेे
दिल के बदले में वफ़ा तो नहीं माँगी जाती

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यहाँ पे दिल की कोई हैसियत नहीं होती
नए ज़माने में अब प्यार भी तिजारत है

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मोहब्बत की तिजारत को यहाँ ले कर न आओ तुम
ख़ुदा देगा तुम्हें जन्नत कहीं तो डूब जाओ तुम

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कर रहा हूँ तिजारती सौदा
फिर करूँगा सदारती सौदा

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मैं तो अपने ख़सारे पर भी हँसता हूँ
समझ तो है तिजारत के उसूलों की

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अब इश्क़ को तरक्की पे लोग तोलते हैं
कैसे इन्हे बताएं ये हैं नहीं तिजारत

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हज़रत ए नासेह कहते हैं मुहब्बत मार देगी
इश्क़ कहता है मुहब्बत को तिज़ारत मार देगी

और गुलचीं तो करेगा बारहा यूँँ ग़ारत ए गुल
इन गुलों को यार गुलचीं की रफ़ाक़त मार देगी

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कितना दुश्वार है जज़्बों की तिजारत करना
एक ही शख़्स से दो बार मोहब्बत करना

जिस को तुम चाहो कोई और न चाहे उस को
इस को कहते हैं मोहब्बत में सियासत करना

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अपने मूल अर्थ में, 'तिज़ारत' व्यापार या वाणिज्य में संलग्न होने की क्रिया को दर्शाता है। यह व्यस्त बाज़ारों और वस्तुओं व विचारों के आदान-प्रदान की छवियों को उभारता है। कविता में, यह शब्द अक्सर भावनाओं और विचारों के आदान-प्रदान, दिल के व्यापार का प्रतीक होता है।

'तिज़ारत' का उपयोग कवि भावनात्मक आदान-प्रदान के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह प्रेम के सौदेबाज़ी, रिश्तों में समझौते, या सपनों और आकांक्षाओं के व्यापार का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

कविता में, 'तिज़ारत' दिल के लेन-देन का रूपक बन जाता है, मानव संबंधों के मूल्य और लागत की याद दिलाता है।