Meaning of

उक़ाब

uqaab • عقاب

गरुड़; शक्ति का प्रतीक; भव्यता

eagle; symbol of power; majesty

عقاب; طاقت کی علامت; عظمت

Arabic

सदा वो शख़्स मुक़ाबिल में हक़ के आएगा
शिकम में जिस के ग़िज़ा है हराम दौलत की

3

Download Image

कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया में
दर्द ग़ुर्बत का साथ देता है

जब मुक़ाबिल हों इश्क़ और दौलत
हुस्न दौलत का साथ देता है

40

Download Image

चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं
हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं

30

Download Image

वो जंग जिस में मुक़ाबिल रहे ज़मीर मिरा
मुझे वो जीत भी 'अंबर' न होगी हार से कम

25

Download Image

ऐ जज़्बा-ए-दिल गर मैं चाहूँ हर चीज़ मुक़ाबिल आ जाए
मंज़िल के लिए दो गाम चलूँ और सामने मंज़िल आ जाए

22

Download Image

कई शे'र पढ़ कर है ये बात जानी
कोई शे'र उस के मुक़ाबिल नहीं है

15

Download Image

कम अज़ कम इक ज़माना चाहता हूँ
कि तुम को भूल जाना चाहता हूँ

ख़ुदारा मुझ को तन्हा छोड़ दीजे
मैं खुल कर मुस्कुराना चाहता हूँ

सरासर आप हूँ मद्दे मुक़ाबिल
ख़ुदी ख़ुद को हराना चाहता हूँ

मेरे हक़ में उरूस-ए-शब है मक़्तल
सो उस से लब मिलाना चाहता हूँ

ये आलम है, कि अपने ही लहू में
सरासर डूब जाना चाहता हूँ

सुना है तोड़ते हो दिल सभों का
सो तुम से दिल लगाना चाहता हूँ

उसी बज़्म-ए-तरब की आरज़ू है
वही मंज़र पुराना चाहता हूँ

नज़र से तीर फैंको हो, सो मैं भी
जिगर पर तीर खाना चाहता हूँ

चराग़ों को पयाम-ए-ख़ामुशी दे
तेरे नज़दीक आना चाहता हूँ

6

Download Image

मैं सच्ची कहूँ तो मेरा दिल नहीं है
वगरना निभाने में मुश्किल नहीं है

कई शे'र पढ़ कर है ये बात जानी
कोई शे'र उस के मुक़ाबिल नहीं है

5

Download Image

मुक़ाबिल फ़ासलों से ही मोहब्बत डूब जाएगी
सुनोगी झूठी बातें तुम हक़ीक़त डूब जाएगी

चलेगी तब तलक जब तक तिरी परछाईं देखेगी
तिरा जब हुस्न देखेगी सियासत डूब जाएगी

3

Download Image

मुक़ाबिल हो नहीं सकता झुका लेता हूँ नज़रें भी
मेरी जुम्बिश बताती है कि मुझ को इश्क़ ने मारा

3

Download Image

सदा वो शख़्स मुक़ाबिल में हक़ के आएगा
शिकम में जिस के ग़िज़ा है हराम दौलत की

3

Download Image

कौन सूद-ओ-ज़ियाँ की दुनिया में
दर्द ग़ुर्बत का साथ देता है

जब मुक़ाबिल हों इश्क़ और दौलत
हुस्न दौलत का साथ देता है

40

Download Image

उक़ाब गरुड़ की भव्यता और शक्ति को समाहित करता है, एक ऐसा प्राणी जो अपनी ताकत और तीव्र दृष्टि के लिए पूजनीय है। कविता में, यह अक्सर स्वतंत्रता, प्रभुत्व और ऊँची उड़ान की भावना का प्रतीक होता है। गरुड़ की उड़ान महत्वाकांक्षा और ऊँचे लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक रूपक है।

कवि उक़ाब का उपयोग शक्ति और स्वतंत्रता की छवियों को जागृत करने के लिए करते हैं। यह अक्सर सांसारिकता के विपरीत होता है, आत्मा की पृथ्वी के बंधनों से ऊपर उठने की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है।

उक़ाब हृदय को ऊँचाई पर उड़ने के लिए प्रेरित करता है, हमें भीतर की असीम संभावनाओं की याद दिलाता है।