Meaning of

वरक़

varq • ورق

पत्ता; पृष्ठ; कागज़

leaf; page; sheet

پتہ; صفحہ; کاغذ

Arabic

कब तक तरब ए'जाज़ हो नग़मात से
कुछ बे-दिली से भी हमें आराम है

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नाम लिख लिख के तिरा फूल बनाने वाला
आज फिर शबनमीं आँखों से वरक़ धोता है

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उतारा दिल के वरक़ पर तो कितना पछताया
वो इंतिसाब जो पहले बस इक किताब पे था

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हर साल की आख़िरी शामों में दो चार वरक़ उड़ जाते हैं
अब और न बिखरे रिश्तों की बोसीदा किताब तो अच्छा हो

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बहुत से ग़म समेट कर बनाई एक डाइरी
चुवाव देख रात भर बनाई एक डाइरी

ये हर्फ़ हर्फ़ लफ़्ज़ लफ़्ज़ क़ब्र है वरक़ वरक़
दिल-ए-हज़ीं से इस क़दर बनाई एक डाइरी

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इश्क़ ओ वफ़ा के सारे वरक़ भूल गए हैं
हम पर किसी का कितना था हक़ भूल गए हैं

ऐ मौत इक सिवाए तेरे याद नहीं कुछ
जितने पढ़े थे सारे सबक़ भूल गए हैं

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नीले लाल निशाँ हैं सारे वरक़ों पर
रात किताबों से पागल ने प्यार किया

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किताबों के वरक़ छाने रिसालों में नहीं देखा
मोहब्बत करने वालों को उजालों में नहीं देखा

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झपके पलक, बदले वरक कैलेंडरों के तब यहाँ
लेकिन हक़ीक़त ज़ीस्त की, तारीख़ में गुम है किसी

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वरक़ पर ज़िंदगी का मैं मिरे मंज़र बनाऊँगी
परिंदा इक बनाऊँगी पर वो बे-पर बनाऊँगी

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कब तक तरब ए'जाज़ हो नग़मात से
कुछ बे-दिली से भी हमें आराम है

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नाम लिख लिख के तिरा फूल बनाने वाला
आज फिर शबनमीं आँखों से वरक़ धोता है

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'वरक़' का मूल अर्थ एक पतला, नाज़ुक पृष्ठ है, अक्सर कागज़ या सोने का। कविता में, यह जीवन की नाज़ुकता और क्षणभंगुरता को दर्शाता है, जैसे एक पत्ता जो पलट सकता है या हवा में उड़ सकता है।

कवि अक्सर 'वरक़' का उपयोग क्षणों की क्षणभंगुरता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह जीवन की किताब में एक पृष्ठ का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जिसे भाग्य की हवाएँ पलट देती हैं। पत्ते या पृष्ठ की छवि नाज़ुकता और समय के बीतने का संकेत देती है।

कवि के हाथों में, 'वरक़' अस्तित्व की क्षणभंगुर सुंदरता के लिए एक कैनवास बन जाता है।