Meaning of

वेश

vesh • آلنکن

वेश; रूप

attire; guise

لباس; روپ

Sanskrit

फूल बिखरा दिए दरवेश ने हर कूचे में
एक पत्थर भी किसी हाथ को हासिल न रहा

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एक दरवेश को तिरी ख़ातिर
सारी बस्ती से इश्क़ हो गया है

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गर कोई मुझ सेे आ कर कहता, यार उदासी है
मैं उस को गले लगाकर कहता, यार उदासी है

होता दरवेश अगर मैं तो फिर सारी दो-पहरी
गलियों में सदा लगाकर कहता, यार उदासी है

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रिज़र्वेशन मिलेगा इश्क़ में क्या
मैं अपनी शक्ल से पिछड़ा हुआ हूँ

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फिर सोच लो इस में निवेश करते समय 'अभय'
ये इश्क़ का बाज़ार जोखिमों के अधीन है

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इस बला के हिज्र में 'भावेश जी'
किस बला को याद करना है तुम्हें

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हम दरवेशों को इतना हल्का भी मत समझें आप
नहीं उठाते वो पैसे जो नीचे गिरे हुए हैं

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फूल बिखरा दिए दरवेश ने हर कूचे में
एक पत्थर भी किसी हाथ को हासिल न रहा

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एक दरवेश को तिरी ख़ातिर
सारी बस्ती से इश्क़ हो गया है

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'वेश' शब्द बाहरी रूप या वह रूप धारण करने का संकेत देता है जिसे कोई अपनाता है। कविता में, यह अक्सर उन मुखौटों का प्रतीक होता है जो लोग पहनते हैं, अपनी सच्ची पहचान को सामाजिक अपेक्षाओं की परतों के नीचे छिपाते हैं।

कवि 'वेश' का उपयोग पहचान और धोखे के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह मानव स्वभाव की द्वैतता का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जहाँ रूप अक्सर वास्तविकता के विपरीत होता है। यह शब्द सामाजिक भूमिकाओं और व्यक्तिगत सत्य के बीच तनाव को उभारता है।

कविता में, 'वेश' हमें बाहरी रूपों से परे देखने की चुनौती देता है, सतह के नीचे छिपे सत्य की खोज करता है।