होंठ का जायका भी गया आँख की मयकशी भी गई
इक तेरे जाने के बाद इस रूह की सादगी भी गई
जो मेरा 'इश्क़ था उसकी शादी कहीं और तय हो चुकी
मैं मरा भी नहीं और मेरे हाथ से ज़िन्दगी भी गई
जल्दी से इक दिये को जला कर रखो रौशनी के लिए
रात से वैसे ही डरता हूँ उसपे ये चाँदनी भी गई
मैं परेशान हो जाता हूँ एक इस बात को सोचकर
पैसे खर्चे गए और मेरे हाथ से नौकरी भी गई
पेड़ों को काटने से हवा में खराबी तो आती ही है
धूप के तेज़ हो जाने से इस ज़मीं की नमी भी गई
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