Meaning of

ज़ारी

zaari • زاری

विलाप; रोना; शोक

lamentation; weeping; mourning

نوحہ; رونا; ماتم

Arabic

ये सोच कर कोई अहद-ए-वफ़ा करो हम सेे
हम एक वादे पे 'उम्रें गुज़ार देते हैं

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जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है

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जो मेरे साथ मोहब्बत में हुई आदमी एक दफा सोचेगा
रात इस डर में गुजारी हम ने कोई देखेगा तो क्या सोचेगा

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तुम्हारे बिन गुज़ारी रात के बस दो ही क़िस्से हैं
कभी हिचकी नहीं रुकती कभी सिसकी नहीं रुकती

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बिछड़ गया हूँ मगर याद करता रहता हूँ
किताब छोड़ चुका हूँ पढ़ाई जारी है

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मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ
ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ

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मैं न सोया रात सारी तुम कहो
बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो

हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी
ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो

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हम भी क्या ज़िंदगी गुज़ार गए
दिल की बाज़ी लगा के हार गए

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मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ
वो मेरे साथ बसर रात क्यूँँ नहीं करता

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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

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ये सोच कर कोई अहद-ए-वफ़ा करो हम सेे
हम एक वादे पे 'उम्रें गुज़ार देते हैं

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जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है

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ज़ारी गहरे दुःख और शोक की अभिव्यक्ति का सार पकड़ती है। यह केवल आँसुओं के बारे में नहीं है, बल्कि हृदय के मूल से आने वाले गहन विलाप के बारे में है। कविता में, यह अक्सर निराशा के क्षणों में आत्मा की पुकार को दर्शाती है।

कवि ज़ारी का उपयोग मानव दुःख की गहराई, हृदय की मौन पुकार, और हानि के सार्वभौमिक अनुभव को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो जुदाई के दर्द और खोए हुए की तड़प के साथ गूंजता है।

ज़ारी हृदय के गहरे दुःखों की गूंज है, एक काव्यात्मक विलाप जो शब्दों से परे है।