Meaning of

ज़ात

zaat • ذات

मूल; पहचान; स्वभाव

essence; identity; nature

جوہر; شناخت; فطرت

Arabic

सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है

है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

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ज़िंदगी कहते हैं जिस को चार दिन की बात है
बस हमेशा रहने वाली इक ख़ुदा की ज़ात है

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दौलतें मुद्दा बनीं या ज़ात आड़े आ गई
इश्क़ में कोई न कोई बात आड़े आ गई

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ज़ात दर ज़ात हम सफ़र रह कर
अजनबी अजनबी को भूल गया

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ये हुनर रब ने मेरी ज़ात में रक्खा हुआ है
अच्छे अच्छो को भी औक़ात में रक्खा हुआ है

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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा
थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा

इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में
अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा

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बिछड़ने का इरादा है तो मुझ से मशवरा कर लो
मोहब्बत में कोई भी फ़ैसला ज़ाती नहीं होता

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रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है
इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने

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असर करती है कोई-कोई बात आहिस्ता आहिस्ता
समझ में आते हैं कुछ मोजज़ात आहिस्ता आहिस्ता

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सियाह रात की सरहद के पार ले गया है
अजीब ख़्वाब था आँखें उतार ले गया है

है अब जो ख़ल्क़ में मजनूँ के नाम से मशहूर
वो मेरी ज़ात से वहशत उधार ले गया है

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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है
मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है

परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो
तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है

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'ज़ात' शब्द व्यक्ति के अस्तित्व के मूल को दर्शाता है, वह आंतरिक पहचान जो बाहरी विशेषताओं से परे होती है। कविता में, यह अक्सर आत्म-समझ की यात्रा को दर्शाता है, एक खोज जो सामाजिक भूमिकाओं और अपेक्षाओं के नीचे छिपे सच्चे सार की होती है।

कवि 'ज़ात' का उपयोग आत्म-खोज और अस्तित्ववादी चिंतन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। इसे अक्सर बाहरी दिखावे या सामाजिक लेबल के साथ विपरीत किया जाता है, जो दैनिक जीवन में पहने जाने वाले मुखौटों और व्यक्ति के सच्चे स्व के बीच के तनाव को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ज़ात' पहचान के गहन चिंतन को आमंत्रित करता है। यह आत्मा के शांत सत्य को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण है।