Meaning of

ज़हानत

zahanat • ذہانت

बुद्धिमत्ता; ज्ञान; चतुराई

intelligence; wisdom; cleverness

ذہانت; حکمت; چالاکی

Arabic

रूबरू वो हो तो कैसे कुछ बात हो
फिर भी दिल चाहता है मुलाक़ात हो

क्यूँँ ये बे-वक़्त ही बरसे बादल यहाँ
साथ में जब रहे वो तो बरसात हो

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अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं
रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे

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श्याम गोकुल न जाना कि राधा का जी अब न बंसी की तानों पे लहराएगा
किस को फ़ुर्सत ग़म-ए-ज़िंदगी से यहाँ कौन बे-वक़्त के राग सुन पाएगा

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वक़्त बे-वक़्त आता है तुझे खोने का डर
इश्क़ की बारिशें अब बे-असर हो चुकी हैं

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वक़्त- बे-वक़्त यूँँ ही आया कर
दिल है घबराता वादो से मेरा

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वक़्त बे-वक़्त बड़ी दूर चला जाता हूँ
चंद टूटे हुए ख़्वाबों का सहारा ले कर

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रूबरू वो हो तो कैसे कुछ बात हो
फिर भी दिल चाहता है मुलाक़ात हो

क्यूँँ ये बे-वक़्त ही बरसे बादल यहाँ
साथ में जब रहे वो तो बरसात हो

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अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं
रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे

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ज़हानत वह मस्तिष्क की तीक्ष्णता है जो साधारण को काटकर गहरे सत्य को प्रकट करती है। यह केवल बुद्धिमत्ता नहीं है, बल्कि एक ऐसी समझ है जो स्पष्ट से परे देखती है। कविता में, यह अक्सर अर्थ और भावना की छिपी परतों को उजागर करती है।

कवि ज़हानत का उपयोग ऐसी पंक्तियाँ रचने के लिए करते हैं जो बुद्धि को चुनौती देती हैं और आत्मा को झकझोरती हैं। यह व्यंग्य के लिए एक उपकरण हो सकता है, अंतर्दृष्टि के लिए एक वाहन, या जीवन की जटिलताओं को दर्शाने वाला एक दर्पण।

ज़हानत समझ की रोशनी है, जो छायाओं को स्पष्टता में बदल देती है।