Meaning of

ज़ख़्म-ए-जिगर

zakham-e-jigar • زخم جگر

जिगर का घाव; गहरी भावनात्मक पीड़ा

wound of the liver; deep emotional pain

جگر کا زخم; گہرا جذباتی درد

Persian

शब-ए-फ़िराक़ में ज़ख़्म-ए-जिगर से रिसता है ख़ूँ
रफ़ू इन्हें भला ख़य्यात क्यूँ नहीं करता

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तुम्हारी याद से ग़ाफ़िल नहीं रहूँगा कभी
हमेशा ज़ख़्म-ए-जिगर को हरा रखूँगा मैं

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इश्क़ के मक़्तल चलो ज़ख़्म-ए-जिगर को देखते हैं
लोग बाज़ीगर के कैसे अब हुनर को देखते हैं

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ख़ंदा-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर हम नहीं सिलने देंगे
ग़म सदा देने लगे ख़ुशियाँ न मिलने देंगे

मौसम-ए-हिज्र ने ऐलान किया गुलशन में
शाख़-ए-दिल तुझ पे गुल-ए-इश्क़ न खिलने देंगे

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भरते कहाँ हैं ज़ख्म-ए-जिगर सर्द में कभी
रह रह के दिल का दर्द उभरता है आज भी

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शब-ए-फ़िराक़ में ज़ख़्म-ए-जिगर से रिसता है ख़ूँ
रफ़ू इन्हें भला ख़य्यात क्यूँ नहीं करता

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तुम्हारी याद से ग़ाफ़िल नहीं रहूँगा कभी
हमेशा ज़ख़्म-ए-जिगर को हरा रखूँगा मैं

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ज़ख़्म-ए-जिगर आंतरिक उथल-पुथल और भावनात्मक पीड़ा की गहरी भावना को व्यक्त करता है। काव्य परंपरा में 'जिगर' अक्सर गहरी भावनाओं से जुड़ा होता है, जिससे यह वाक्यांश तीव्र दिल के दर्द का रूपक बन जाता है।

कवि ज़ख़्म-ए-जिगर का उपयोग दुःख और लालसा की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर अप्राप्त प्रेम या गहरे नुकसान से संबंधित छंदों में प्रकट होता है।

ज़ख़्म-ए-जिगर मानव की गहरी भावनात्मक अनुभवों की क्षमता की मार्मिक याद दिलाता है।