Meaning of

ज़ौक़-ए-सफ़र

zauq-e-safar • رات رانی

यात्रा का आनंद; सफर की खुशी

pleasure of journey; joy of travel

سفر کا لطف; سفر کی خوشی

Persian

कुछ ज़ियादा अज़ीज़ था मुझ को
शख़्स जो मर गया कहानी में

चाय पीते हैं चाँद तकते हैं
खोए रहते हैं रात रानी में

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नई फ़स्लों को ये कुछ और से कुछ और करते हैं
गुलाबों की जो ख़ुशबू ढूॅंढ़ते हैं रातरानी में

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सफ़र के बा'द भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए
ख़याल ओ ख़्वाब में अब के भी घर न रह जाए

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हर इक मक़ाम से आगे मक़ाम है तेरा
हयात ज़ौक़-ए-सफ़र के सिवा कुछ और नहीं

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वो जो तुम से गले लगते होंगे
रातरानी सा महकते होंगे

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हाथ गुल से औ बदन में रातरानी की महक
आप को लड़की नहीं इक बाग़ होना चाहिए

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कुछ ज़ियादा अज़ीज़ था मुझ को
शख़्स जो मर गया कहानी में

चाय पीते हैं चाँद तकते हैं
खोए रहते हैं रात रानी में

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नई फ़स्लों को ये कुछ और से कुछ और करते हैं
गुलाबों की जो ख़ुशबू ढूॅंढ़ते हैं रातरानी में

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‘ज़ौक़-ए-सफ़र’ वाक्यांश यात्रा के कार्य से प्राप्त होने वाले आनंद और खुशी को पकड़ता है। यह केवल गंतव्य के बजाय यात्रा के प्रति प्रेम का सुझाव देता है। कविता में, यह शब्द अक्सर जीवन की यात्रा का प्रतीक है, जो अनुभवों और खोजों से भरी होती है जो आत्मा को समृद्ध करती हैं।

कवि ‘ज़ौक़-ए-सफ़र’ का उपयोग जीवन की यात्रा में मिलने वाली खुशी को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर गंतव्यों की अंतिमता के विपरीत उपयोग किया जाता है, पथ की सुंदरता को उजागर करते हुए। यह शब्द अंतहीन सड़कों और खोज की रोमांचकता की छवियों को जगाने में सक्षम है।

काव्यिक क्षेत्र में, ‘ज़ौक़-ए-सफ़र’ हमें यात्रा को संजोने के लिए आमंत्रित करता है, न कि केवल गंतव्य को। यह हमें याद दिलाता है कि पथ स्वयं अपने खजाने रखता है।