Meaning of

ज़िक्र-ए-शब-ए-विसाल

zikr-e-shab-e-visaal • ذکر شب وصال

मिलन की रात का ज़िक्र

mention of the night of union

وصال کی رات کا ذکر

Persian

'ज़िक्र-ए-शब-ए-विसाल' वाक्यांश मिलन की रात के सार को पकड़ता है, जो अक्सर लालसा और पूर्ति से भरी होती है। कविता में, यह उन क्षणों की सुंदरता और तीव्रता को उभारता है जब प्रेमी मिलते हैं, समय और स्थान को पार करते हुए।

कवि अक्सर 'ज़िक्र-ए-शब-ए-विसाल' का उपयोग प्रेम और मिलन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह इच्छाओं की पराकाष्ठा या पूर्ण क्षणों की क्षणभंगुर प्रकृति का प्रतीक हो सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ज़िक्र-ए-शब-ए-विसाल' प्रेम के अंतिम मिलन का उत्सव है, एक क्षण जहां सपने वास्तविकता को छूते हैं।