छुपा रहा हूँ मेरे अश्क आह करते हुए
जब उस को देख रहा हूँ निकाह करते हुए
शब-ए-फ़िराक़ हुआ था जो शे'र मैं ने पढ़ा
तो लोग रोने लगे वाह वाह करते हुए
यहाँ तो आँख पे पट्टी बँधी है सब के मगर
ख़ुदा तो देख रहा है गुनाह करते हुए
कसूरवार अदालत में कर दिया उस ने
सवाल पर मेरी जानिब निगाह करते हुए
— Dipendra Singh 'Raaz'















