मुख़लिस रहे सख़ी भी रहे मोतबर रहे
हर शख़्स की नज़र में मगर मुख़्तसर रहे
उसने बस एक बार में दीवाना कर दिया
हम लाख कोशिशों के इवज़ बेअसर रहे
ये ऐ़न शीन क़ाफ़ मैं मानूॅंगा तब मियाॅं
कोई किसी की याद में जब उम्र-भर रहे
अब मत बताओ 'इश्क़ में कितने हैं फ़ाएदे
सदियाँ गुज़र गईं हैं अभी ज़ख़्म भर रहे
सरवर सुख़नवरी में वही कामयाब है
जो शख़्स शायरी में सदा पुरअसर रहे
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