raushni charaagon se door rah nahin sakti | रौशनी चराग़ों से दूर रह नहीं सकती

  - Manohar Shimpi

रौशनी चराग़ों से दूर रह नहीं सकती
हम-नशीं क़रीबी का शोक सह नहीं सकती

कौन साँप रखता है आस्तीन में यारो
ऐसे दोस्त को कोई बात कह नहीं सकती

वास्ता रहे गहरा जब किसी के ग़म का ही
आँसुओं को धोकर भी आँख बह नहीं सकती

और नाम आएँगे देख हादिसे को तू
कौन लोग होंगे वो मैं ये कह नहीं सकती

नींव ही अगर अच्छी जब रहे 'मनोहर' तब
कोई भी इमारत फिर ऐसे ढह नहीं सकती

  - Manohar Shimpi

More by Manohar Shimpi

As you were reading Shayari by Manohar Shimpi

Similar Writers

our suggestion based on Manohar Shimpi

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari