is qadar sacchaai se bezaar duniya ho gaii | इस क़दर सच्चाई से बेज़ार दुनिया हो गई

  - Mujahid Faraz

इस क़दर सच्चाई से बेज़ार दुनिया हो गई
ज़द पे गर्दन है मेरी तलवार दुनिया हो गई

उस के दिल में नीम गोली शहद बातों में रखे
पूछते क्या हो मियाँ मक्कार दुनिया हो गई

बे-हयाई बे-वफ़ाई बे-यक़ीनी बे-हिसी
कैसे कैसे ख़ंजरों की धार दुनिया हो गई

मस्लहत ने किस क़दर तब्दील उस को कर दिया
ग़ैर मैं हूँ इन दिनों ग़म-ख़्वार दुनिया हो गई

क्या समझते हो यक़ीं कर लेगी तुम कुछ भी कहो
सोच कर देना बयाँ हुश्यार दुनिया हो गई

क्या सहाफ़ी क्या मुअर्रिख़ कैसे आलिम क्या अदीब
देखते ही देखते बाज़ार दुनिया हो गई

हार कर जिस ने किया है उस से समझौता 'फ़राज़'
हाँ उसी के वास्ते हमवार दुनिया हो गई

  - Mujahid Faraz

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