hamne beshak 'ishq ladaana chhod diya | हमने बेशक 'इश्क़ लड़ाना छोड़ दिया

  - Nityanand Vajpayee

हमने बेशक 'इश्क़ लड़ाना छोड़ दिया
पत्थर से सर को टकराना छोड़ दिया

जिन गलियों में खुलती थी उनकी खिड़की
उन गलियों में आना-जाना छोड़ दिया

कुछ कलियों में इतना ख़ुश्क मिज़ाज दिखा
भँवरों ने उन पर मँडराना छोड़ दिया

दीवारों से रंजिश थी बेशक़ लेक़िन
मैं ने ईंट से ईंट बजाना छोड़ दिया

स्वाद पता है हमको हर झरबेरी का
इस से हमने अब ललचाना छोड़ दिया

नागफ़नी को एक फूल है माथे पर
ख़ारों ने जिस को चुभ जाना छोड़ दिया

पिछली बार हुई थी जबसे नाराज़ी
रूठा-रूठी और मनाना छोड़ दिया

'नित्य' पड़ा जब ख़ुद ही ज़ख़्मों को सीना
मैं ने भी रोना चिल्लाना छोड़ दिया

  - Nityanand Vajpayee

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