ruksaar jahaan men koii aisa nahin hogaa | रुख़सार जहाँ में कोई ऐसा नहीं होगा

  - SALIM RAZA REWA

रुख़सार जहाँ में कोई ऐसा नहीं होगा
उन सेे भी हसीं चाँद का चेहरा नहीं होगा

तुम चाँद सितारों की चमक में रहे उलझे
तुमने मेरे महबूब को देखा नहीं होगा

अल्लाह के महबूब पे है ख़त्म नबूवत
अब कोई नबी दुनिया में पैदा नहीं होगा

जो मेरे दिल-ओ-जान को करता है मुअत्तर
गुलशन में कोई फूल भी ऐसा नहीं होगा

है कौन भला सर पे बलाऍं जो ले तेरी
कोई भी तो माँ -बाप के जैसा नहीं होगा

महबूब-ए-दो आलम से जो करता है मोहब्बत
दुनिया में रज़ा वो कभी रुसवा नहीं होगा

  - SALIM RAZA REWA

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