ये खाना खा नहीं सकता, ये पानी पी नहीं सकता
बिना तेरे, तो ये बेचैन आशिक़ जी नहीं सकता
बिना तेरे, तो ये बेचैन आशिक़ जी नहीं सकता
ये अपनी साँस, तेरी उन नरम बाँहों में तोड़ेगा
किसी भी दूसरे रस्ते से ये मर ही नहीं सकता
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फ़कीरी मुफ़लिसी में ही, गुज़ारी ज़िन्दगी हम ने
ग़ज़ल तेरे नशे में ही, संँवारी ज़िन्दगी हम ने
ग़ज़ल तेरे नशे में ही, संँवारी ज़िन्दगी हम ने
मुहब्बत छोड़ के बस लग गया हूँ शा'इरी में अब
फ़क़त इक इस तरीके से, सुधारी ज़िन्दगी हम ने
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भागा दौड़ी में उलझी है दुनिया सारी
इक आशिक़ ही तो है, जो आगे नई बढ़ता
इक आशिक़ ही तो है, जो आगे नई बढ़ता
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मुहब्बत, इश्क़, ये सब अब कहाँ होता है, बोतल दो
नशा कर के, जहाँ मेरा, जहाँ लगता है, बोतल दो
नशा कर के, जहाँ मेरा, जहाँ लगता है, बोतल दो
नहीं पीता अकेले मैं, बहुत हैं प्यार के मारे
मिरे जैसा शराबी वो, वहाँ रहता है, बोतल दो
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पुराना इश्क़ है मेरा, उसे ही याद करता है
उसे खोने से डरता है, उसे पाने से डरता है
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बहुत मुश्किल बहुत तकलीफ़ से तुम ने बुलाया है
मुहब्बत चीज़ क्या होती, ये तुम ने ही बताया है
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