फ़कीरी मुफ़लिसी में ही, गुज़ारी ज़िन्दगी हम नेग़ज़ल तेरे नशे में ही, संँवारी ज़िन्दगी हम नेमुहब्बत छोड़ के बस लग गया हूँ शा'इरी में अबफ़क़त इक इस तरीके से, सुधारी ज़िन्दगी हम ने— Sarthak Bechen