Govind kumar

Top 10 of Govind kumar

    तुम बिछड़कर मुस्कराना चाहती हो
    यानी मुफ़लिस से ख़ज़ाना चाहती हो

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    छोटी छोटी बातों पे तकरार नहीं करते
    सच्चे दोस्त कभी पीछे से वार नहीं करते

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    खुद को खुद से कभी न खोना तू
    दर्द दिल में न कोई बोना तू

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    चुप रहने से अच्छे खासे हो जाते हैं पागल
    ख़ुश रहते हैं जो अपने जज़्बात बता देते हैं

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    मुश्किल सभी को होती है दो चार दिन
    आखिर में कट ही जाते हैं बेकार दिन

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    दर्द की राह को पार हमने किया
    खेल की उम्र में प्यार हमने किया

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    कम नहीं होता है उस बीमार का दुख
    जिसको होता है किसी के प्यार का दुख

    तुम हटाओं उसकी हर तस्वीर घर से
    रोज कहता है हमें दीवार का दुख

    अब भला उम्मीद उनसे क्या रखें हम
    जिनको दिखता ही नहीं दिलदार का दुख

    फिर कभी जाता नहीं है दूर हमसे
    सुन लिया इक बार जिनसे यार का दुख

    तुम मिरी मज़बूरी शायद ही समझतें
    तुमने देखा ही नहीं घर-बार का दुख

    लग रही है ये कहानी सब को अच्छी
    पर कोई समझा नहीं क़िरदार का दुख

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    काश अपने दरमियाँ इक यार होता
    अपना ये रिश्ता न हद से पार होता

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    दोस्ती हमने तुमसे पुरानी रखी
    कोई चाहत न अब ख़ानदानी रखी

    बस रखा नाम लब पर हमेशा तिरा
    दिल में इक भी न तेरी निशानी रखी

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    तंज़ करना फिर उसी से प्यार करना
    जाँ कहा से सीखा है ये वार करना

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