तुम बिछड़ कर मुस्कराना चाहती हो
या'नी मुफ़लिस से ख़ज़ाना चाहती हो
या'नी मुफ़लिस से ख़ज़ाना चाहती हो
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छोटी छोटी बातों पे तकरार नहीं करते
सच्चे दोस्त कभी पीछे से वार नहीं करते
सच्चे दोस्त कभी पीछे से वार नहीं करते
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चुप रहने से अच्छे खासे हो जाते हैं पागल
ख़ुश रहते हैं जो अपने जज़्बात बता देते हैं
ख़ुश रहते हैं जो अपने जज़्बात बता देते हैं
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कम नहीं होता है उस बीमार का दुख
जिस को होता है किसी के प्यार का दुख
जिस को होता है किसी के प्यार का दुख
तुम हटाओं उस की हर तस्वीर घर से
रोज़ कहता है हमें दीवार का दुख
अब भला उम्मीद उन से क्या रखें हम
जिन को दिखता ही नहीं दिलदार का दुख
फिर कभी जाता नहीं है दूर हम से
सुन लिया इक बार जिन से यार का दुख
तुम मिरी मज़बूरी शायद ही समझतें
तुम ने देखा ही नहीं घर-बार का दुख
लग रही है ये कहानी सब को अच्छी
पर कोई समझा नहीं क़िरदार का दुख
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दोस्ती हम ने तुम से पुरानी रखी
कोई चाहत न अब ख़ानदानी रखी
कोई चाहत न अब ख़ानदानी रखी
बस रखा नाम लब पर हमेशा तिरा
दिल में इक भी न तेरी निशानी रखी
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तंज़ करना फिर उसी से प्यार करना
जाँ कहा से सीखा है ये वार करना
जाँ कहा से सीखा है ये वार करना
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