चुप रहने से अच्छे खासे हो जाते हैं पागल
ख़ुश रहते हैं जो अपने जज़्बात बता देते हैं
कम नहीं होता है उस बीमार का दुख
जिसको होता है किसी के प्यार का दुख
तुम हटाओं उसकी हर तस्वीर घर से
रोज कहता है हमें दीवार का दुख
अब भला उम्मीद उनसे क्या रखें हम
जिनको दिखता ही नहीं दिलदार का दुख
फिर कभी जाता नहीं है दूर हमसे
सुन लिया इक बार जिनसे यार का दुख
तुम मिरी मज़बूरी शायद ही समझतें
तुमने देखा ही नहीं घर-बार का दुख
लग रही है ये कहानी सब को अच्छी
पर कोई समझा नहीं क़िरदार का दुख
दोस्ती हमने तुमसे पुरानी रखी
कोई चाहत न अब ख़ानदानी रखी
बस रखा नाम लब पर हमेशा तिरा
दिल में इक भी न तेरी निशानी रखी