kam nahin hota hai us beemaar ka dukh | कम नहीं होता है उस बीमार का दुख

  - Govind kumar

कम नहीं होता है उस बीमार का दुख
जिसको होता है किसी के प्यार का दुख

तुम हटाओं उसकी हर तस्वीर घर से
रोज़ कहता है हमें दीवार का दुख

अब भला उम्मीद उन सेे क्या रखें हम
जिनको दिखता ही नहीं दिलदार का दुख

फिर कभी जाता नहीं है दूर हम सेे
सुन लिया इक बार जिनसे यार का दुख

तुम मिरी मज़बूरी शायद ही समझतें
तुमने देखा ही नहीं घर-बार का दुख

लग रही है ये कहानी सब को अच्छी
पर कोई समझा नहीं क़िरदार का दुख

  - Govind kumar

Mehboob Shayari

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