ये वही हाथ है जो था
में गए
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शुक्रिया दोस्त तेरी बे-वफ़ाई का
अब निखरने लगी है शा'इरी मेरी
अब निखरने लगी है शा'इरी मेरी
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दावे से कहता हूँ मैं ये बात आप सब से
कोई नहीं है जिस पे उस सा जमाल होगा
कोई नहीं है जिस पे उस सा जमाल होगा
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तग़ाफ़ुल का गिला तुझ से करें तेरी ही महफ़िल में
रक़ीबों को ख़बर तो हो कभी तुम भी हमारे थे
रक़ीबों को ख़बर तो हो कभी तुम भी हमारे थे
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हाल-ए-दिल उन से हम ने कहा ही नहीं
सिलसिला दरमियाँ जब रहा ही नहीं
सिलसिला दरमियाँ जब रहा ही नहीं
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आता न था ये लहजा जो बातों में है मेरी
तहज़ीब है ये सीखी उर्दू की ही ज़बाँ से
तहज़ीब है ये सीखी उर्दू की ही ज़बाँ से
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ज़माने में निभाने को बहुत यूँ तो सहारे थे
न शामिल ज़िक्र तेरा नाम जो मैं ने पुकारे थे
न शामिल ज़िक्र तेरा नाम जो मैं ने पुकारे थे
तिरे वादों की ख़ातिर महज़ तोड़े राब्ते सारे
मोहब्बत के समुंदर में न सोहबत के किनारे थे
तग़ाफ़ुल का गिला तुझ से करें तेरी ही महफ़िल में
रक़ीबों को ख़बर तो हो कभी तुम भी हमारे थे
निभाने में क़सर बाक़ी न छोड़ी याद तो होगा
मोहब्बत के जुनूँ में जो ख़म-ए-गेसू सँवारे थे
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