Rohan Hamirpuriya

Rohan Hamirpuriya

@KhayaalKalamAurHum

Rohan Hamirpuriya shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rohan Hamirpuriya's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

घर के हर कमरे में ऐ सी रखने वाला सब से ज़्यादा परेशाँ है धरती की ख़ातिर — Rohan Hamirpuriya
थोड़ा सा जो मैं शातिर हूँ सिर्फ़ तुम्हारी ख़ातिर हूँ — Rohan Hamirpuriya
ये हँसने गाने वाले लोग तस्वीरों में रह जाऍंगे — Rohan Hamirpuriya
नज़रें मिलने का खेल ही तो इश्क़ का पहला बीज ठहरा — Rohan Hamirpuriya
दुनिया ने तस्लीम किया जब फ़न अपना घर पे जमघट रहता है मेहमानों का — Rohan Hamirpuriya
ख़ुशनुमा रहा समाँ जब तलक क़रीब थे हो गए ख़िलाफ़ वो चार दिन के साथ से — Rohan Hamirpuriya
फिर मुहब्बत उस सेे गर होगी ज़ख़्म फिर कोई हरा होगा — Rohan Hamirpuriya
झेले हैं जिस की ख़ातिर मुहब्बत में हम ने अज़ाब कहता फिरता है सब सेे मुहब्बत में क्या रक्खा है — Rohan Hamirpuriya
गर्मी दिल्ली की सह नहीं पाते बात करते हैं साथ रहने की — Rohan Hamirpuriya
घाव का दरिया भर गया कब का चाक सीना निखर गया कब का — Rohan Hamirpuriya
सब बाहों में झूल चुकी है वो तुझ को कब का भूल चुकी है वो — Rohan Hamirpuriya
सुनते हैं रात होती है सोने के लिए हम को तो रास आई है रोने के लिए — Rohan Hamirpuriya
शिगाफ़ देख के कमरे की दीवारों का लगता है हाल अच्छा नहीं है दीवानों का — Rohan Hamirpuriya
कुछ इस वजह से भी वो मुझ सेे दूर है पहले से उस की माँग में सिंदूर है — Rohan Hamirpuriya
रब्त उस सेे बढ़ा कर के इतरा रहे हैं रक़ीब उस के पहलू में तो मैं ने अर्सा बिता रक्खा है — Rohan Hamirpuriya
है मुकरने का इरादा गर देख लेना फिर बुरा होगा — Rohan Hamirpuriya
भूला नहीं हूँ माज़ी का अफ़साना गुज़रा कल ही है फ़िलहाल मेरा — Rohan Hamirpuriya

Ghazal

पूछिए न बच्चे से दूर क्यूँ है बस्ते से रिश्ते टूट जाते हैं रोज़-रोज़ झगडे से आख़िरी दफ़ा मिल कर मिल ले मुझ से अच्छे से हो गया हूँ बे-तरतीब तेरे हाँ न करने से जिस्म गर नहीं हासिल खेल ले खिलौने से कर्बला को आता देख हट गया मैं रस्ते से याद करना है बचपन ला किताब बस्ते से थोड़ी भी हो गुंजाइश लौट आना रस्ते से हाँ है रिश्ता नाजाइज़ कौन डरता मरने से तुझ से मिलने से पहले दूर था मैं मरने से उन की यारी कच्ची थी दोस्त थे जो पक्के से टल गई है बर्बादी तेरे हाँ न करने से बा'द इतनी मुद्दत के हैं उसी पे अटके से उस से अपना झगड़ा है और वो भी अरसे से लगते कान पे झुमके दो सितारे लटके से ये दिवाल 'रोहन' ने पक्की की है कच्चे से — Rohan Hamirpuriya