इंसान से क़यामत के दिन सवाल होगा
अपने किए पे सबको दुख और मलाल होगा
उसने कहा-सुनी में पकड़ा मेरा गिरेबाँ
मैं समझा था कि मेरा वो हम-ख़याल होगा
दावे से कहता हूँ मैं ये बात आप सब सेे
कोई नहीं है जिस पे उस सा जमाल होगा
बातें रक़ीबों की हैं अब आपकी ज़बाँ पर
रिश्ता निभाना बेशक अब तो मुहाल होगा
वो शख़्स मर चुका है कब का मगर अभी तो
कुछ रोज़ उसकी दौलत पर भी बवाल होगा
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