तुम हरी चूड़ी न देते
शादी की गोली न देते
बद-सुलूकी सब भली पर
चाय तो ठंडी न देते
फूल गर बस में नहीं थे
कम से कम डाली न देते
कहना था तो मुझ को कहते
बच्चों को गाली न देते
देर से आया था लेकिन
ग़ैर की थाली न देते
जब मुहब्बत ही नहीं थी
ज़ाफ़राँ साड़ी न देते
पैसे ही लेने थे तो फिर
प्यासे को पानी न देते
पैसा-ज़ेवर माँगा था तो
वहशी को लड़की न देते
ज़िंदा था उम्मीद पे तो
प्यासे को पानी न देते
बे-असर हर बात 'रोहन'
लफ़्ज़ों को मानी न देते
— Rohan Hamirpuriya















