तेरे कहे में आ गया
धोखा मिला और खा गया
अरसे से तेरे साथ हूँ
क्यूँ मुझ से तू घबरा गया
कुछ ख़त पुराने गिर पड़े
मैं दफ़अ'तन शर्मा गया
मैं पूछता कुछ और था
वो बात और करता गया
सच बोलने के वास्ते
मैं भीड़ से कटता गया
सब ख़त्म होना था जहाँ
मैं क्यूँ वहीं तक आ गया
जो मुझ से बच के चलता था
इक रोज़ ख़ुद टकरा गया
जो लौट कर आया नहीं
वो ख़्वाब बन कर आ गया
तन्हा तू है तन्हा मैं हूँ
हो कर जुदा क्या पा गया
— Rohan Hamirpuriya















