किया तूने मिस्मार मुझको
मुहब्बत थी दरकार मुझको
बना वहशी मैं जिनकी ख़ातिर
लगे कहने बीमार मुझको
है चेहरे पे वो नूर उसके
हुआ 'इश्क़ दो बार मुझको
मेरा फ़ैसला पुख़्ता है पर
नसीहत दे दो-चार मुझको
शुरू से शुरू करना पड़ता
तेरे संग हर बार मुझको
वफ़ा का सिला कम ही मिलता
तेरे संग हर बार मुझको
दिखा करता है मसख़रा वो
तेरे संग हर बार मुझको
मिटा दूँ तेरे जुर्म सारे
जो तू समझे सरकार मुझको
Read Full