'ishq men kacche nahin | 'इश्क़ में कच्चे नहीं

  - Rohan Hamirpuriya

'इश्क़ में कच्चे नहीं
मात से डरते नहीं

मिलना था तुझ से मगर
मिलने को मरते नहीं

होंठ हैं होंठों पे और
आगे कुछ करते नहीं

जिस्म को यकदम छू लें
इतने भी भूखे नहीं

जान इक बेग़म हैं दो
मौत से डरते नहीं

पूरे होने वाले हैं
ख़्वाब जो सींचे नहीं

शादी की जब बात हो
पक्का है कहते नहीं

भूख दो की पैसा एक
मरते पर मरते नहीं

दो क़दम ही दूर है
दो क़दम चलते नहीं

  - Rohan Hamirpuriya

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