फिर उसकी आरज़ू हर काम के बाद
उदासी छा जाती है शाम के बाद
दुनिया वाले पूछ ही डालेंगे
लगाते क्या हो अपने नाम के बाद
रंजीदा लोगों का ये कहना है
वहशत बढ़ती है हर जाम के बाद
ख़ल्वत में पड़े रहना आसाँ नहीं
थकान होती है इस आराम के बाद
सबके भीतर रावण तो ज़िंदा है
अब किसको पूजोगे राम के बाद
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