apne ghar usne mujh ko akelaa bula rakkha hai | अपने घर उसने मुझ को अकेले बुला रक्खा है

  - Rohan Hamirpuriya

अपने घर उसने मुझ को अकेले बुला रक्खा है
इत्र से कमरा फूलों से बिस्तर सजा रक्खा है

आप इक तरफ़ा ऐलान कर देते तो अच्छा था
वक़्त आने पे देखेंगे ये क्या लगा रक्खा है

झेले हैं जिसकी ख़ातिर मुहब्बत में हमने अज़ाब
कहता फिरता है सब सेे मुहब्बत में क्या रक्खा है

रात भर पढ़ता होगा ये लगता है माँ बाप को
और लड़के को लड़की ने रातों जगा रक्खा है

चार दिन बाहों में ले के इतरा रहे हैं रक़ीब
उसके पहलू में तो मैंने अरसा बिता रक्खा है

  - Rohan Hamirpuriya

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