पूछिए न बच्चे से
दूर क्यूँ है बस्ते से
रिश्ते टूट जाते हैं
रोज़-रोज़ झगडे से
आख़िरी दफ़ा मिल कर
मिल ले मुझ से अच्छे से
हो गया हूँ बे-तरतीब
तेरे हाँ न करने से
जिस्म गर नहीं हासिल
खेल ले खिलौने से
कर्बला को आता देख
हट गया मैं रस्ते से
याद करना है बचपन
ला किताब बस्ते से
थोड़ी भी हो गुंजाइश
लौट आना रस्ते से
हाँ है रिश्ता नाजाइज़
कौन डरता मरने से
तुझ से मिलने से पहले
दूर था मैं मरने से
उन की यारी कच्ची थी
दोस्त थे जो पक्के से
टल गई है बर्बादी
तेरे हाँ न करने से
बाद इतनी मुद्दत के
हैं उसी पे अटके से
उस से अपना झगड़ा है
और वो भी अरसे से
लगते कान पे झुमके
दो सितारे लटके से
ये दिवाल 'रोहन' ने
पक्की की है कच्चे से
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