Pawan Kumar

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Pawan Kumar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Pawan Kumar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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Sher

अब दिल ही नहीं लगता, इन चाँद सितारों में हम उन सेे जुदा होकर रोते हैं बहारों में — Pawan Kumar
माज़ी इक लंबी सियाह परछाई है मुस्तकबिल में दूर तलक तन्हाई है — Pawan Kumar

Nazm

"हमदर्दी" बस मैं जितना भी रहा हमेशा अपने कद में रहा इस लिए शायद सराहा नहीं गया मेरी कोई बात,कोई आदत मेरी ज़रूरत भी ज़रूरत भर ही रही मेहनत ने दिया बहुत मगर मुझे संजोना नहीं आया मुठ्ठी खुली ही रही मुझे बाँधना नहीं आया कोई बंधन इस लिए मैं जितना भी रहा अपनी हद में रहा। न ही बढ़ाना आया हाथ मुझे मदद के लिए न अपनी,न किसी और की सूखती ही गई भीतर की नदी बाहर बहना नहीं आया ख़ुशी को भी बहुत अच्छे से कभी कहना नहीं आया यूँ मैं जितना भी रहा बस अपनी जद में रहा जहाँ रहना चाहिए था मौन वहीं मसखरापन दिखा दिया और जहाँ हँसना चाहिए था तब सील लिए लब मुझ को नहीं बतानी आई बात सलीक़े से न संवेदना जताने का शऊर आया हर किसी का दुःख-दर्द मुझे और धकेलता गया मेरे भीतर नहीं बन पाया मैं किसी की चाह, न बता सका अपना मन अपने खोल से मुझे निकलना ही नहीं आया इस लिए मैं जितना भी रहा बस ख़ुद में रहा — Pawan Kumar