"वो ख़ुशबू"
वो जो बाद-ए-बहार के साथ
शामिल हुई थी मुझ
में वो
जिसे तेरी निखत-ए-नफ़्स
जान बैठा था मैं वो ख़ुशबू अब कहाँ?
ख़िज़ाँ की खुश्क आधी ज्यूँ ही दाखिल हुई मुझ
में
गुलों के रंग के साथ उड़ गई वो ख़ुशबू
— Pawan Kumar
वो जो बाद-ए-बहार के साथ
शामिल हुई थी मुझ
में वो
जिसे तेरी निखत-ए-नफ़्स
जान बैठा था मैं वो ख़ुशबू अब कहाँ?
ख़िज़ाँ की खुश्क आधी ज्यूँ ही दाखिल हुई मुझ
में
गुलों के रंग के साथ उड़ गई वो ख़ुशबू
Other nazm from the same pen
Shers of khushboo.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling