'Sabaa'

'Sabaa'

@Saba098

'Sabaa' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in 'Sabaa''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

क्यूँ हमेशा आसमाँ छूने की हो जंग इक दफ़ा देखो ज़रा छू के ज़मीं भी — 'Sabaa'
ये मसअला नहीं है मियाँ धर्म का कोई मशरूत हूँ मैं कुंबा की इज़्जत के नाम पर — 'Sabaa'
ख़्वाब रूठे कोई उम्मीद टूटे जो भी हो अब नहीं रोती मुझे आ गया है सब्र माँ — 'Sabaa'

Ghazal

हर ज़ुल्म ढाते हैं वो मुहब्बत के नाम पर फिर छीनते हैं रूह भी हिजरत के नाम पर और सीखने थे क़ायदे हम को तो इश्क़ के पर हम ने सीखा शिर्क इबादत के नाम पर कहते थे ख़ुद को दोस्त हूँ मैं दोस्त हूँ तिरा लग्ज़िश सिखा गए हैं वो ग़ैरत के नाम पर क्या इस तरह लिखी गई थी उस की ज़िन्दगी होती है रोज़ दफ़्न जो इज़्ज़त के नाम पर ये मसअला नहीं है मियाँ धर्म का कोई मशरूत हूँ मैं कुंबा की इज़्ज़त के नाम पर ज्यूँ ही ख़याल आया के पढ़ लिख के कुछ बनूँ सब लूट ले गया कोई शोहरत के नाम पर दम तोड़ते हैं गोद में ही ख़्वाब आजकल पलते थे मुझ में जो कभी आदत के नाम पर चलना था हम को रोज़ 'सबा' वक़्त की तरह पर सो गए हैं चैन से क़िस्मत के नाम पर — 'Sabaa'