"उर्दू"

    हिंद की ताजदार है उर्दू
    इस चमन की बहार है उर्दू
    लखनऊ की नज़ाकतों की क़सम
    दिलबर-ए-तरहदार है उर्दू
    दिल्ली वालों के दिल को लूट लिया
    शौख़ चंचल निगार है उर्दू
    लाल क़िलऐ की रौनक़ों की क़सम
    जलवा-ए-सदबहार है उर्दू
    फ़ख़्र से कह रहा है ताजमहल
    इश्क़ की यादगार है उर्दू
    रेख़्ती बेगमात की ज़ीनत
    शह ज़फ़र का वक़ार है उर्दू
    मीर-ओ-ग़ालिब, नज़ीर-ओ- मोमिन क्या
    दाग़ का भी क़रार है उर्दू
    नासिख़-ओ-मुसहफ़ी, नसीर और ज़ौक़
    सैकड़ों का क़रार है उर्दू
    यास, इन्शा हो या अनीस-ओ-दबीर
    सारे यारों की यार है उर्दू
    आतिश-ओ-दर्द के तसव्वुफ़ की
    ख़ूब आईनादार है उर्दू

    हाँ जलाल-ओ-जलील और अकबर
    सबको करती शिकार है उर्दू
    उलझे जोश-ओ-फ़िराक़ और चकबस्त
    दाम-ए-गेसू-ए-यार है उर्दू
    साइल-ओ-बेख़ुद-ओ-रसा उलझे
    गेसु-ए-ताबदार है उर्दू
    नब्ज़ देखेंगे ड़ॉक्टर इक़बाल
    दर्द से बेक़रार है उर्दू
    हाली हसरत हफ़ीज़ भी हैं फ़िदा
    वो उरुस-ए-बहार है उर्दू
    हाँ! अदम और मजाज़ से पूछो
    लज़्ज़त-ए-सदख़ुमार है उर्दू
    पूछो अख़्तर शकील -ओ-साहिर से
    जान-ए-नग़मानिगार है उर्दू
    कैफ़ी मजरूह हसरत-ओ-अंजान
    गीतकारों की यार है उर्दू
    क़िस्मत-ए-दुख्तर-ए-ब्रज भाषा
    दुश्मनी का शिकार है उर्दू
    रेख़्ता अहले हिन्द से पूछो
    क्यूँ ग़रीबुद्दियार है उर्दू

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    मसलहत है फरेब-ए-हसीं
    एक झूठी किरन की तरह

    हो गयी महफ़िल-ए-नाज़ भी
    एक उजड़े चमन की तरह

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    मज़लूम को कुछ लोग बुरा कहने लगे हैं
    ज़ालिम को बजा कहने का अंदाज़ तो देखो

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    धोका खाने के हम आदी है किस क़दर
    अबके भी उनके धोके में हम आ गए

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    मस्त है तारीख़ अपने हाल में
    इसको मुस्तक़बिल का अंदाज़ा नहीं

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    रेख़्ता हाथ में ज़मीं भी नहीं
    बात करते हो आसमानों की

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    नसीब अपना है रूठे हुए सनम की तरह
    अगर ख़ुशी कभी मिलती भी है तो ग़म की तरह

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    सारे हुक़ूक़ छीन चुके मेरे घर के लोग
    अपने ही घर में रहता हूँ मेहमान की तरह

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    जुदाई इश्क़ का दस्तूर क्यूँ है हम नहीं समझे
    मोहब्बत इस क़दर मजबूर क्यूँ है हम नहीं समझे

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    मैं अपनी राह अलग ख़ुद बनाके चलता हूँ
    वो और होंगे जो नक़्शे कदम पे चलते हैं

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