Yogamber Agri

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    मैंने चाहा तेरे जाने में न कुछ कमी रहे
    कोन चाहे उम्र भर ही आँखों में नमी रहे

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    मैं बीच में हूँ तेरे ग़म को छोडूं तो ये लगता है
    कि पीछे मेरा शव है आगे मेरी ही मज़ार है

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    साथ छोड़ा तुम ने तो क़ुसूर मेरा ही तो है
    पेड़ सूख जाए तो परिंदे मिलते ही नहीं

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    माँ के बनाई हाथों की खीर उसको दूँगा
    मुफ़्लिस को तो कहाँ आता चॉकलेट देना

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    मैं काला टीका तेरी मुस्कान पर लगा लूँ
    देखा है मैंने इस पर लड़ते जहाँ को सारा

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    उस की बेवफ़ाई मुझ को समझ में आई जब
    मैं ने ख़ुद को उसकी हालत पे रख के ये सोचा

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    बुरी तुम नहीं मैं बुरा इतना हूँ की
    भुला भी नहीं पा रहा हूँ मैं तुम को

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    बस दो क़दम की दूरी पे घर उसका ही है पर
    उन रास्तों से अन बन हैं बहुत सी मेरी

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    मोहब्बत तो ख़ुदा का इक तराना है
    इसे ता-उम्र सब ने गुन गुनाना है

    तेरे हर ग़म से रिश्ता जोड़ा है मैं ने
    मुझे तो तेरे हर ग़म को निभाना है

    जुदा हो के मैं फिर भी तुम को पाता हूँ
    जुदाई को भी सीने से लगाना है

    तमन्ना है नहीं जब तुम सफ़र में हो
    तेरे दिल तक ही बस मेरा ठिकाना है

    कभी जो देख लूँ बादल में मैं तुम को
    क़मर बादल में मेरा आशियाना है

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    उठ के जिया अज़ाब जब यूँ सीने पे मैंने देखा
    मेरा दिया गुलाब जब उसने मेरे मुँह पे मारा

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