Yogamber Agri

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Yogamber Agri shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Yogamber Agri's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

हाथों में दिल लिए हम परेशान हैं और वो कह रही है कि कैसे हो तुम — Yogamber Agri
मैं ने चाहा तेरे जाने में न कुछ कमी रहे कोन चाहे उम्र भर ही आँखों में नमी रहे — Yogamber Agri
साथ छोड़ा तुम ने तो क़ुसूर मेरा ही तो है पेड़ सूख जाए तो परिंदे मिलते ही नहीं — Yogamber Agri
मैं फूल तो तुम को दूँगा तुम नहीं देना बस मिल जाए जो दिल मेरा दिल में तो उसे देना — Yogamber Agri
हैं इतने उम्दा होंठ हिस्से क्यूँ हमारे होंगे ये उसे पता था चॉकलेट इनको ही बनाई है — Yogamber Agri
माँ के बनाई हाथों की खीर उस को दूँगा मुफ़्लिस को तो कहाँ आता चॉकलेट देना — Yogamber Agri
तुम धूप हो मेरी मैं पौधा तेरे बिन या'नी बिन धूप के फोटोसिंथेसिस का नहीं होना — Yogamber Agri
हाथ नीचे करता हूँ मैं तुम अगर कह दो हवा से कान के पीछे से ज़ुल्फ़ें तेरे चेहरे पर न लाए — Yogamber Agri
मुझ को उस से लड़ना या जीतना नहीं है बस है वो साथ मेरे ये जीत काफ़ी है मुझ को — Yogamber Agri
मैं बीच में हूँ तेरे ग़म को छोडूं तो ये लगता है कि पीछे मेरा शव है आगे मेरी ही मज़ार है — Yogamber Agri
भटक जाते हैं नफ़रत करने वाले रस्ता सो तुझ को जो रस्ते में मिले उस से मोहब्बत तू भी करता चल — Yogamber Agri
होंठों से उस के और तो क्या चाहें सुनना हम कह दे वो बस मैं तुम से बहुत प्यार करती हूँ — Yogamber Agri
किया था उस ने वा'दा उस को याद आ नहीं रहा तो हम ने अपना इंतिज़ार ही तवील कर दिया — Yogamber Agri
तीन हफ़्तों तक मैं भी तो कहाँ से सोया था तीन बार जब उस ने लव यूँ टू कहा मुझ को — Yogamber Agri
मैं काला टीका तेरी मुस्कान पर लगा लूँ देखा है मैं ने इस पर लड़ते जहाँ को सारा — Yogamber Agri
उस की बे-वफ़ाई मुझ को समझ में आई जब मैं ने ख़ुद को उस की हालत पे रख के ये सोचा — Yogamber Agri
अब किसी का ख़ूब-सूरत चेहरा देखूँ मैं अगर तो सोचता हूँ कितना उस का हिज्र प्यारा उम्दा होगा — Yogamber Agri
इल्म था हम को हमारा बॉन्ड टूटेगा ही इक दिन उस को अक्सर कार्बन का बॉन्ड आता था बनाना — Yogamber Agri

Ghazal

ज़िंदगी को आज़ मैं भी ज़िंदगी कर लेता हूँ बुझ गए हर ज़ख़्म को मैं रौशनी कर लेता हूँ शे'र अच्छे या ग़ज़ल अच्छी मुझे लिखनी है तो हुस्न को उस के मैं उस की सादगी कर लेता हूँ इस से पहले तेरा रिश्ता हो किसी ग़ाफ़िल से तय मैं ग़म-ए-जानाँ को अपनी ज़िंदगी कर लेता हूँ आशिक़ी या शा'इरी होती नहीं इक साथ तो आशिक़ी भी छोड़ी सोचा शा'इरी कर लेता हूँ ख़ुद-कुशी तुझ को गुमाँ है मैं गिला करवाता हूँ ख़ुद-कुशी से ख़ुद मिटाकर मैं ख़ुशी कर लेता हूँ सोच मत इस बद-गुमानी को तू 'योगम्बर' बहुत हो कहीं मन तेरा मैं भी ख़ुद-कुशी कर लेता हूँ — Yogamber Agri
कहीं कभी भी वो कहे मुझे किसी से प्यार है तो यारों तब मुझे ही देखती वो बार-बार है ये कहना उस सेे देर कर दी लौट आने में बहुत मैं इन्तिज़ार में नहीं ना तेरी अब पुकार है वो रूठी तो दरख़्त रूठे फिर परिंदे उड़ गए मैं कैसे उस को रोकता कि तुम से मुझ को प्यार है तुम्हें भुला तो देता मैं मगर है मसअला ये है कि मैं बे रोज़गार हूँ तू मेरा रोज़गार है मैं बीच में हूँ तेरे ग़म को छोडूं तो ये लगता है कि पीछे मेरा शव है आगे मेरी ही मज़ार है कोई तो रुत बुलाए पेड़ों को हरा भरा करे कि पेड़ों को परिंदों को मिलाने का ख़ुमार है — Yogamber Agri