रह के ख़ुश अब तो करना है ग़म का मफ़र
काटना है यूँ ही ज़िंदगी का सफ़र
काटना है यूँ ही ज़िंदगी का सफ़र
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अब भरोसा किसी का न करना 'शिवम्'
दर्द होता बहुत जब भी टूटे भरम
दर्द होता बहुत जब भी टूटे भरम
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शाम बाँहों में उन की गुज़र जाने दे
वक़्त अब मुझ को थोड़ा ठहर जाने दे
वक़्त अब मुझ को थोड़ा ठहर जाने दे
चल चुका हूँ बहुत मंज़िलों के लिए
भूल राहों के अब से सफ़र जाने दे
रेत साहिल की उड़ना न चाहे है अब
लहर ख़ुद को किनारे उतर जाने दे
है तमन्ना यही फूल बनकर अभी
मुझ को राहों में उन की बिखर जाने दे
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निहारा था बड़ी शिद्दत से उस ने इक दफ़ा मुझ को
तभी नज़रों में उस की मैं ने पूरा खो दिया ख़ुद को
तभी नज़रों में उस की मैं ने पूरा खो दिया ख़ुद को
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ज़िन्दगी हमें जब उलझन तमाम देती है
मौत चैन का फिर दे इक पयाम देती है
मौत चैन का फिर दे इक पयाम देती है
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कोई नहीं है जो छुआ हो रूह को
चाहत सभी को जिस्म की ही है रही
चाहत सभी को जिस्म की ही है रही
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