Kabir Athar

Kabir Athar

@kabir-athar

Kabir Athar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kabir Athar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

सितारा सुब्ह का मैं और चराग़ शाम का तू न तेरे काम का मैं हूँ न मेरे काम का तू — Kabir Athar
तुझ को भी ग़म ने अगर ठीक से बरता होता तेरे चेहरे पे ख़द-ओ-ख़ाल हमारे होते — Kabir Athar
ये हम जो औरों के दुख का ठेका लिए हुए हैं किसी ने इस का मआल पूछा तो क्या कहेंगे — Kabir Athar
कहीं मैं देर से पहुँचूँ तो याद आता है कहीं मैं वक़्त से पहले भी जाया करता था — Kabir Athar
बस इतना दख़्ल था मेरा ख़ुदा के कामों में मैं मरते लोगों की जाने बचाया करता था — Kabir Athar

Ghazal

मैं वो ज़िया भी किसी काम लाया करता था जिसे चराग़ धुएँ में उड़ाया करता था और अब तो मैं भी सर-ए-राह फेंक देता हूँ कभी मैं फूल नदी में बहाएा करता था कहीं मैं देर से पहुँचूँ तो याद आता है कहीं मैं वक़्त से पहले भी जाया करता था बस इतना दख़्ल था मेरा ख़ुदा के कामों में मैं मरते लोगों की जाने बचाया करता था मेरे सुपुर्द किफ़ालत थी बे-ज़बानों की मैं रिज़्क़ इस लिए वाफ़िर कमाया करता था ये ख़ुद मुझे भी बड़ी देर में हुआ मालूम कि कोई दुख मुझे अंदर से खाया करता था चराग़ इस लिए सुनते थे ग़ौर से मुझ को मैं रौशनी को सलीक़े से गाया करता था मैं उस के इश्क़ में पागल था फिर भी दिल मेरा मेरे ख़लूस पर तोहमत लगाया करता था कुछ इस लिए भी ज़ियादा थी रौशनी मेरी कि मैं चराग़ नहीं दिल जलाया करता था मेरे वुजूद में जब भी घुटन सी होती थी मैं घर की छत पर कबूतर उड़ाया करता था — Kabir Athar