Kaif Bhopali

Top 10 of Kaif Bhopali

    तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
    तेरे आगे चाँद पुराना लगता है
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    ज़िंदगी शायद इसी का नाम है
    दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ
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    झूम के जब रिंदों ने पिला दी
    शैख़ ने चुपके चुपके दुआ दी

    एक कमी थी ताज-महल में
    मैं ने तिरी तस्वीर लगा दी

    आप ने झूटा वा'दा कर के
    आज हमारी उम्र बढ़ा दी

    हाए ये उन का तर्ज़-ए-मोहब्बत
    आँख से बस इक बूँद गिरा दी
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    तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
    तेरे आगे चाँद पुराना लगता है

    तिरछे तिरछे तीर नज़र के लगते हैं
    सीधा सीधा दिल पे निशाना लगता है

    आग का क्या है पल दो पल में लगती है
    बुझते बुझते एक ज़माना लगता है

    पाँव ना बाँधा पंछी का पर बाँधा
    आज का बच्चा कितना सियाना लगता है

    सच तो ये है फूल का दिल भी छलनी है
    हँसता चेहरा एक बहाना लगता है

    सुनने वाले घंटों सुनते रहते हैं
    मेरा फ़साना सब का फ़साना लगता है

    'कैफ़' बता क्या तेरी ग़ज़ल में जादू है
    बच्चा बच्चा तेरा दिवाना लगता है
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    कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा
    मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा

    दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क
    कोई ख़त ले के पड़ोसी के घर आया होगा

    इस गुलिस्ताँ की यही रीत है ऐ शाख़-ए-गुल
    तू ने जिस फूल को पाला वो पराया होगा

    दिल की क़िस्मत ही में लिक्खा था अंधेरा शायद
    वर्ना मस्जिद का दिया किस ने बुझाया होगा

    गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो
    आँधियो तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा

    खेलने के लिए बच्चे निकल आए होंगे
    चाँद अब उस की गली में उतर आया होगा

    'कैफ़' परदेस में मत याद करो अपना मकाँ
    अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा
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    एक कमी थी ताज-महल में
    मैंने तिरी तस्वीर लगा दी
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    तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है
    सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है

    तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है
    तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है
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    आग का क्या है पल दो पल में लगती है
    बुझते बुझते एक ज़माना लगता है
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    कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा
    मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा

    दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क
    कोई ख़त ले के पड़ोसी के घर आया होगा

    इस गुलिस्ताँ की यही रीत है ऐ शाख़-ए-गुल
    तू ने जिस फूल को पाला वो पराया होगा

    दिल की क़िस्मत ही में लिक्खा था अंधेरा शायद
    वर्ना मस्जिद का दिया किस ने बुझाया होगा

    गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो
    आँधियो तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा

    खेलने के लिए बच्चे निकल आए होंगे
    चाँद अब उस की गली में उतर आया होगा

    'कैफ़' परदेस में मत याद करो अपना मकाँ
    अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा
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    तुझे कौन जानता था मेरी दोस्ती से पहले
    तेरा हुस्न कुछ नहीं था मेरी शायरी से पहले
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