Meeraji

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Meeraji shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Meeraji's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

नगरी नगरी फिरा मुसाफ़िर घर का रस्ता भूल गया क्या है तेरा क्या है मेरा अपना पराया भूल गया — Meeraji

Ghazal

चाँद सितारे क़ैद हैं सारे वक़्त के बंदी-ख़ाने में लेकिन मैं आज़ाद हूँ साक़ी छोटे से पैमाने में उम्र है फ़ानी उम्र है बाक़ी इस की कुछ पर्वा ही नहीं तू ये कह दे वक़्त लगेगा कितना आने जाने में तुझ से दूरी दूरी कब थी पास और दूर तो धोका हैं फ़र्क़ नहीं अनमोल रतन को खो कर फिर से पाने में दो पल की थी अंधी जवानी नादानी की भर पाया उम्र भला क्यूँँ बीते सारी रो रो कर पछताने में पहले तेरा दीवाना था अब है अपना दीवाना पागल-पन है वैसा ही कुछ फ़र्क़ नहीं दीवाने में ख़ुशियाँ आईं अच्छा आईं मुझ को क्या एहसास नहीं सुध-बुध सारी भूल गया हूँ दुख के गीत सुनाने में अपनी बीती कैसे सुनाएँ मद-मस्ती की बातें हैं 'मीरा-जी' का जीवन बीता पास के इक मय-ख़ाने में — Meeraji
नगरी नगरी फिरा मुसाफ़िर घर का रस्ता भूल गया क्या है तेरा क्या है मेरा अपना पराया भूल गया क्या भूला कैसे भूला क्यूँँ पूछते हो बस यूँँ समझो कारन दोश नहीं है कोई भूला भाला भूल गया कैसे दिन थे कैसी रातें कैसी बातें घातें थीं मन बालक है पहले प्यार का सुंदर सपना भूल गया अँधियारे से एक किरन ने झाँक के देखा शरमाई धुँदली छब तो याद रही कैसा था चेहरा भूल गया याद के फेर में आ कर दिल पर ऐसी कारी चोट लगी दुख में सुख है सुख में दुख है भेद ये न्यारा भूल गया एक नज़र की एक ही पल की बात है डोरी साँसों की एक नज़र का नूर मिटा जब इक पल बीता भूल गया सूझ-बूझ की बात नहीं है मन-मौजी है मस्ताना लहर लहर से जा सर पटका सागर गहरा भूल गया — Meeraji